कांग्रेस लीडर राहुल गांधी आज बुधवार को दिल्ली के जंतर-मंतर में तेलंगाना के पिछड़ा वर्ग संगठनों के प्रदर्शन में शामिल होंगे। ये संगठन 17 मार्च को तेलंगाना विधानसभा में पारित उस बिल के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए आरक्षण को 23 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत करने की बात कही गई है। अगर यह बिल लागू हो जाता है, तो तेलंगाना में आरक्षण की सीमा 62% हो जाएगी। लेकिन भारत में आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय की गई है। ऐसे में इस बिल को लागू करन के लिए संसद की मंजूरी जरूरी है। इधर, तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष बोम्मा महेश कुमार गौड़ समेत राज्य के कई मंत्री और विधायक मंगलवार शाम दिल्ली रवाना हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, CM रेवंत रेड्डी भी प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनाव से पहले OBC कोटा बढ़ाने का वादा किया था। आरक्षण बढ़ाने को लेकर सीएम रेड्डी का X पोस्ट… तेलंगाना CM बोले- राज्यपाल को 42 प्रतिशत आरक्षण का नया प्रस्ताव भेजा
तेलंगाना CM ने विधानसभा में कहा- कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वादा किया था कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो OBC आरक्षण को बढ़ाकर 42 प्रतिशत किया जाएगा। सत्ता संभालने के तुरंत बाद, हमारी सरकार ने जाति जनगणना शुरू की। इससे पहले की कांग्रेस सरकार ने OBC आरक्षण को 37 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए राज्यपाल को प्रस्ताव भेजा था। यह सरकार पहले के प्रस्ताव को वापस ले रही है, अब 42 प्रतिशत आरक्षण का नया प्रस्ताव भेज रही है। हम OBC आरक्षण को 42 प्रतिशत बढ़ाने के लिए आवश्यक कानूनी सहायता भी लेंगे। हम तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक पिछड़े वर्गों के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण हासिल नहीं हो जाता। प्रस्ताव पास तो हो जाएगा, लेकिन नियमों का उल्लंघन
117 सीटों वाली तेलंगाना की विधानसभा में कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। इसलिए विधानसभा में तो OBC आरक्षण वाला बिल पास हो जाएगा लेकिन इसके लागू होने के बाद तेलंगाना में आरक्षण की सीमा 62% पहुंच जाएगी। यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित किए गए 50% आरक्षण की सीमा का उल्लंघन होगा। अब आगे क्या… बिहार में आरक्षण 75% हुआ था, कोर्ट ने रोक लगाई थी
तेलंगाना से पहले बिहार में आरक्षण की सीमा 50% से बढ़ाने की कोशिश की गई थी। बिहार विधानसभा में 9 नवंबर 2023 को आरक्षण संशोधन विधेयक 2023 पास हो गया था। इसमें जातिगत आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 65% कर दिया गया था। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के 10% कोटे को मिलाकर बिहार में कुल रिजर्वेशन 75% किया जाना था। ये आरक्षण के लिए तय अधिकतम सीमा, यानी 50%, से काफी ज्यादा था। हाईकोर्ट ने पहले रोक लगाई, सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा
जुलाई 2024 में पटना हाईकोर्ट ने इस कदम को खारिज कर दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिहार सरकार का यह कदम संविधान के द्वारा दिए गए समानता के अधिकार में दखल देगा। तेलंगाना से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों और पुलिस में झड़प:BRS का आरोप- स्टूडेंट्स को बाल पकड़कर घसीटा, लड़कियों के कपड़े फाड़े हैदराबाद यूनिवर्सिटी के पास आईटी पार्क बनाने के का विरोध कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच रविवार को खूब हंगामा हुआ। छात्र पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं की वजह से प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे थे। इस घटना के बाद राजनीतिक विवाद पैदा हो गया है। विपक्षी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों के बाल पकड़कर घसीटा और उनकी पिटाई की। लड़कियों के कपड़े फाड़े गए। वहीं, छात्रों ने कहा- बुलडोजर आते देख वे मौके पर पहुंचे थे। पूरी खबर पढ़े…

