नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया ने इतिहास रच दिया है। वे नौसेना की पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं। यह उपलब्धि उन्होंने विशाखापत्तनम के नौसैनिक एयर बेस पर गुरुवार को हासिल की।
कैसे मिली यह उपलब्धि?
आस्था पूनिया ने ‘बेसिक हॉक कन्वर्जन कोर्स’ का दूसरा बैच पूरा किया। यह कोर्स लड़ाकू विमानों को उड़ाने के लिए जरूरी ट्रेनिंग का हिस्सा होता है। इस कोर्स के पूरा होने के बाद उन्हें ‘विंग्स ऑफ गोल्ड’ सम्मान दिया गया।
किन-किन को मिला सम्मान?
- लेफ्टिनेंट अतुल कुमार
- सब लेफ्टिनेंट आस्था पूनिया
क्या है ‘विंग्स ऑफ गोल्ड’?
‘विंग्स ऑफ गोल्ड’ एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जो नौसेना के पायलट बनने के बाद दिया जाता है। यह पायलट के साहस और कड़ी मेहनत की निशानी होती है।
महिलाओं के लिए एक नया रास्ता
अब तक भारतीय नौसेना में महिलाएँ टोही विमान (सर्विलांस एयरक्राफ्ट) और हेलीकॉप्टर उड़ाती थीं। इसके अलावा कई महिलाएँ वायु संचालन अधिकारी (Air Operations Officer) के रूप में भी काम कर रही हैं। लेकिन आस्था पूनिया ने लड़ाकू विमानों (fighter jets) की फील्ड में कदम रखकर महिलाओं के लिए एक नया अध्याय शुरू किया है।
नौसेना की पोस्ट में क्या कहा गया?
भारतीय नौसेना ने सोशल मीडिया पर भी आस्था पूनिया की इस उपलब्धि के बारे में पोस्ट किया। पोस्ट में लिखा गया “नौसेना विमानन में एक नया अध्याय। भारतीय नौसेना ने 3 जुलाई को दूसरा बेसिक हॉक कन्वर्जन कोर्स पूरा कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। आस्था पूनिया ने बाधाओं को तोड़ते हुए फाइटर पायलटों के नए युग की शुरुआत की।”



