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धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा कैसे करें

भगवान धन्वंतरि को आरोग्य (स्वास्थ्य) का देवता माना जाता है। धनतेरस के दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण हर साल धनतेरस के दिन, माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा करने की परंपरा है।

  भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि (Bhagwan Dhanvantri Ki Puja Vidhi)

  1. पूजा की तैयारी
  • सबसे पहले एक लकड़ी का साफ पटरा (चौकी) लें।
  • उस पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं।
  • फिर उस पर भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • साथ ही माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की मूर्तियाँ या तस्वीरें भी रखें।
  1. पूजा की प्रक्रिया
  • सबसे पहले घी का दीपक जलाएं।
  • भगवान धन्वंतरि को तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें।
  • पूजा करते समय भगवान से अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्रार्थना करें।
  • पूजा के दौरान यह मंत्र जरूर जपें –

“ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः”

  1. आरती और भोग
  • पूजा के बाद भगवान धन्वंतरि की आरती करें।
  • फिर उन्हें फल, मिठाई या पंचामृत का भोग लगाएं।
  • परिवार के सभी सदस्य मिलकर भगवान का नाम स्मरण करें।

धनतेरस पूजा मुहूर्त 2025

धनतेरस पूजा का शुभ समय:
शाम 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक रहेगा।
इस समय के दौरान भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।

धन्वंतरि भगवान पूजा मंत्र

भगवान धन्वंतरि की पूजा के दौरान यह मुख्य मंत्र जपना चाहिए —

ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरायेः।
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय।
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप।
श्री धन्वंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥

यह मंत्र रोग, भय और दुखों से मुक्ति देता है तथा शरीर में नई ऊर्जा और स्वास्थ्य का संचार करता है।

भगवान धन्वंतरि की आरती (Dhanvantari Bhagwan Ki Aarti)

ॐ जय धन्वन्तरि देवा, स्वामी जय धन्वन्तरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा॥

तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट, आकर दूर किए॥

आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का साधन बतलाया॥

भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी॥

तुमको जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे॥

हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य समाज तुम्हारे चरणों का घेरा॥

धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे॥

ॐ जय धन्वन्तरि देवा, स्वामी जय धन्वन्तरि जी देवा॥

पूजा का महत्व

  • भगवान धन्वंतरि की पूजा से रोग, कष्ट और भय दूर होते हैं।
  • घर में स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि आती है।
  • जो व्यक्ति नियमित रूप से धन्वंतरि भगवान का ध्यान करता है, उसे आयुर्वेदिक ज्ञान और अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है।

Hind Lehar

Writer & Blogger

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