Khatu Shyam Baba : राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम बाबा का मंदिर हर समय भक्तों से भरा रहता है। बता दें कि बाबा को कलियुग में भक्तों का खास सहारा माना जाता है और उनकी पूजा करने से इच्छाएं पूरी होती हैं। खाटू श्याम बाबा की कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है। इनका असली नाम बर्बरीक था, जो भीम के पुत्र थे। उन्होंने भगवान कृष्ण को अपने शीश का दान दिया था, इसी कारण भक्त उन्हें शीशदानी के नाम से भी जानते हैं। उनके इस त्याग और भक्ति को देखकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि वे कलियुग में उनके नाम से पूजे जाएंगे। यही कारण है कि बर्बरीक का नाम श्याम पड़ा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खाटू श्याम बाबा की पूजा करने के लिए गुरुवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है। यह दिन गुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु से जुड़ा है। चूंकि श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार थे और खाटू श्याम बाबा भी उनके ही रूप हैं, इसलिए गुरुवार को उनकी आराधना विशेष फलदायक होती है। इसके अलावा, एकादशी तिथि पर भी उनकी पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है।
खाटू श्याम बाबा की पूजा का सबसे शुभ दिन
मंदिर में हर गुरुवार और एकादशी को विशेष पूजा और भंडारे का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा पूर्णिमा और फाल्गुन मेला के दौरान भी भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। हालांकि, जो भक्त मंदिर नहीं आ पाते, उनके लिए गुरुवार और एकादशी के दिन घर पर पूजा करना विशेष फलदायक माना जाता है।
खाटू श्याम बाबा की पूजा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भक्तों के मन को शांति और संतोष देने का माध्यम भी मानी जाती है। लोग मानते हैं कि इनकी आराधना से जीवन में समस्याओं का समाधान और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
इस प्रकार, गुरुवार और एकादशी तिथि को खाटू श्याम बाबा की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। चाहे मंदिर आएं या घर पर पूजा करें, भक्त इन दिनों विशेष रूप से बाबा के प्रति श्रद्धा और भक्ति दिखाते हैं। यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जा रही है।
(Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।)



