Mala Jap ka niyam: हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की आराधना के अनेक मार्ग बताए गए हैं। कोई भक्त पूजा-पाठ, आरती और भजन के माध्यम से ईश्वर को प्रसन्न करता है, तो कोई मंत्र जप को साधना का मुख्य साधन मानता है। शास्त्रों में मंत्र जप को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है, लेकिन यह तभी फलदायी होता है जब इसे सही विधि और नियमों के अनुसार किया जाए। मंत्र जप में माला का विशेष स्थान है, क्योंकि माला न केवल गिनती का साधन है बल्कि साधक की ऊर्जा को भी एकाग्र करती है।
जप माला कैसी होनी चाहिए
मान्यताओं के अनुसार मंत्र जप के लिए 108 मनकों वाली माला का ही प्रयोग करना चाहिए। माला के सभी दाने साबुत और समान होने चाहिए, कोई भी मनका टूटा या खंडित नहीं होना चाहिए। जप माला को काले धागे में पिरोया हुआ शुभ नहीं माना जाता। इसके बजाय पीले, सफेद या लाल धागे में गुंथी माला को श्रेष्ठ माना गया है। माला को खरीदते समय उसकी शुद्धता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
माला जप के समय अपनाएं ये नियम
मंत्र जप के लिए हमेशा अपनी व्यक्तिगत माला का ही उपयोग करें। किसी अन्य व्यक्ति की माला से जप करना उचित नहीं माना जाता। जो माला गले में धारण की जाती है, उसे जप के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जप करते समय माला को गोमुखी में रखकर मंत्रों का उच्चारण करना उत्तम माना गया है। साथ ही, माला की मेरु मणि को पार नहीं करना चाहिए, बल्कि वहां से माला को उल्टा घुमाना चाहिए। अपवित्र अवस्था या अशुद्ध मन से माला जप करने से बचना चाहिए।
किस देवता के लिए कौन-सी माला
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी की माला से भगवान विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण के मंत्रों का जप करना श्रेष्ठ माना गया है। सफेद चंदन की माला भी विष्णु उपासना के लिए उपयुक्त होती है। देवी साधना में लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग किया जाता है। भगवान शिव और हनुमान जी की पूजा में रुद्राक्ष की माला विशेष फल देती है। चंद्र देव के मंत्र मोती की माला से और गुरु बृहस्पति के लिए हल्दी की माला से जप करना शुभ माना गया है, जबकि शुक्र देव की साधना में स्फटिक की माला का महत्व बताया गया है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. हिन्द लहर इसकी पुष्टि नहीं करता है.)



