Dhanteras 2025: दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है और यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष धनतेरस 18 अक्टूबर 2025 को पड़ रहा है, जबकि दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। धनतेरस को विशेष रूप से समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है।
धनतेरस पर किसकी पूजा होती है?
धनतेरस पर मुख्य रूप से तीन देवताओं की पूजा की जाती है
- भगवान धन्वंतरि: जिन्हें आयुर्वेद का जनक और देवताओं के वैद्य के रूप में जाना जाता है। वे विष्णु भगवान के अवतार माने जाते हैं। इस दिन उनकी पूजा स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के लिए की जाती है।
- माता लक्ष्मी: धन और वैभव की देवी। माना जाता है कि इस दिन वे पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों को धन-धान्य से भर देती हैं।
- कुबेर देव: धन के स्वामी और खजानों के संरक्षक। उनकी पूजा घर में समृद्धि लाने के लिए की जाती है।
धनतेरस पर पूजा करने से न केवल स्वास्थ्य और धन की प्राप्ति होती है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और सुख-शांति का वास भी माना जाता है।
धनतेरस की पौराणिक कथा
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब देवताओं और असुरों ने अमृत कलश प्राप्त करने के लिए मंथन किया, तब भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। यही दिन धनतेरस के रूप में मनाया गया।
एक अन्य कथा के अनुसार, इस दिन माता लक्ष्मी अपने भक्तों के घर आती हैं और उनके घर को धन-धान्य से भर देती हैं। इसीलिए इस दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन या नई वस्तुएं खरीदते हैं।
पूजा का महत्व और विधि
धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा की विधि इस प्रकार है:
-घर की सफाई करें और उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा स्थल सजाएं।
-देवताओं की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
-दीपक जलाएं, फूल, मिठाई और धूप अर्पित करें।
-धन्वंतरि स्तोत्र या लक्ष्मी मंत्र का जाप करें।
-इस दिन नई वस्तुएं या धातु के सामान खरीदें और पूजा में शामिल करें।
-शाम के समय दीपदान करने की परंपरा भी है।
-ऐसा करने से यम देव प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
–सोना, चांदी या चांदी के सिक्के
–पीतल या तांबे के बर्तन
–झाड़ू (माता लक्ष्मी का प्रतीक)
–इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं या वाहन



