नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session 2025) शुरू होने जा रहा है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि यह सत्र 1 दिसंबर 2025 से 19 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सत्र की तिथि को मंजूरी देते हुए आशा जताई है कि यह सत्र उत्पादक, रचनात्मक और लोकतंत्र को मजबूत करने वाला सिद्ध होगा।
राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, उपराष्ट्रपति पहली बार सभापति के रूप में करेंगे संचालन
इस शीतकालीन सत्र में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन पहली बार राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्यभार संभालेंगे। उन्होंने 12 सितंबर 2025 को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। ऐसे में यह सत्र उनके लिए भी विशेष महत्व रखता है।
सत्र में होगी कई अहम मुद्दों पर चर्चा
शीतकालीन सत्र को आमतौर पर वर्ष का अंतिम सत्र माना जाता है, जो सरकार की नीतियों की समीक्षा और आगामी वर्ष के बजट की तैयारी का आधार तय करता है। इस बार भी केंद्र सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह 2026 के बजट से पहले अपनी आर्थिक और सामाजिक नीतियों पर विस्तार से चर्चा करेगी। वहीं, विपक्ष भी जनता से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है।
पिछले सत्र में कम रही उत्पादकता
21 जुलाई से 21 अगस्त 2025 के बीच चले मानसून सत्र के दौरान संसद का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। लगातार व्यवधानों के कारण लोकसभा ने निर्धारित 120 घंटों में से केवल 37 घंटे, जबकि राज्यसभा ने 41 घंटे 15 मिनट तक ही कार्य किया था। यह क्रमशः 31% और 38.8% की उत्पादकता को दर्शाता है। इसलिए इस बार सरकार और विपक्ष, दोनों ही बेहतर सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं ताकि महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत निर्णयों पर ठोस प्रगति हो सके।
लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि “यह सत्र हमारे लोकतंत्र को और मज़बूत करेगा तथा देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में सार्थक भूमिका निभाएगा।”



