Shardiya Navratri : हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत खास महत्व है। साल में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है – चैत्र, आषाढ़, आश्विन (शारदीय) और माघ महीने में। इनमें से शारदीय नवरात्रि सबसे शुभ और फलदायी मानी जाती है। इस दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर, सोमवार से हो रही है। इस दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है।
मां शैलपुत्री का परिचय
मां शैलपुत्री का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है –
- शैल का अर्थ है पहाड़
- पुत्री का अर्थ है बेटी
इसलिए मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री कहा जाता है।
मां शैलपुत्री का स्वरूप
- मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल होता है।
- बाएं हाथ में कमल का फूल होता है।
- मां नंदी बैल पर सवार रहती हैं।
- इन्हें प्रकृति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और सफलता मिलती है।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा विधि
- सुबह की तैयारी
- प्रातःकाल जल्दी उठें और स्नान करें।
- साफ-सुथरे और preferably लाल या पीले रंग के कपड़े पहनें।
- पूजा स्थल की तैयारी
- पूजा करने की जगह को अच्छी तरह साफ करें।
- चौकी पर लाल या पीले कपड़े का आसन बिछाएं।
- उस पर मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- कलश स्थापना
- एक कलश को पानी से भरें।
- उस पर नारियल और आम के पत्ते रखें।
- यह कलश पूरे नवरात्रि के दौरान शुभता का प्रतीक माना जाता है।
- पूजा सामग्री अर्पण
- मां को सिंदूर, अक्षत (चावल), रोली, फूल, धूप और दीप अर्पित करें।
- घी से बने व्यंजन और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
- आरती और प्रार्थना
- मां की आरती करें।
- परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
मां शैलपुत्री का मंत्र
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप बहुत शुभ माना जाता है –
“ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः ॥”
इस मंत्र का 108 बार जप करने से मां का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
- जीवन में स्थिरता और सफलता मिलती है।
- पितृ दोष और चंद्रमा से जुड़ी समस्याओं का समाधान होता है।
- व्यक्ति में आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है।
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।



