Skanda Sashti 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार आज 25 दिसंबर 2025, गुरुवार को पौष माह की स्कंद षष्ठी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र तथा देवसेनापति भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं में स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से भक्तों को साहस, पराक्रम, बुद्धि और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। साथ ही यह व्रत संतान सुख, संतान की लंबी आयु और पारिवारिक सुख-शांति के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
पूजा के शुभ मुहूर्त
स्कंद षष्ठी के दिन पूजा के लिए कुछ विशेष समय अत्यंत शुभ माने गए हैं।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से 12:42 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:05 बजे से 02:46 बजे तक
इन मुहूर्तों में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
स्कंद षष्ठी की पूजा विधि
इस दिन भक्तों को प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा भी रखें।
भगवान कार्तिकेय का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। उन्हें चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत, पुष्प, धूप व दीप अर्पित करें। भोग में केसर मिला दूध, श्रीखंड, गुड़ और चने अर्पित किए जाते हैं। दक्षिण भारत में कंदमूल अर्पित करने की भी परंपरा है।
पूजा के दौरान स्कंद षष्ठी व्रत कथा का पाठ करें और अंत में कपूर से आरती करें। मंत्र जाप विशेष फलदायी माना जाता है-“ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महासैन्याय धीमहि तन्नो स्कंदः प्रचोदयात॥”



